प्रकृति रक्षक
आदर्श वाक्य — “प्रकृति की रक्षा, जीवन की सुरक्षा”
प्रकृति रक्षक भारत पुत्र फाउंडेशन की एक पर्यावरणीय एवं जनजागरूकता पहल है, जिसका उद्देश्य प्रकृति, पर्यावरण, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति समाज में जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और सक्रिय सहभागिता की भावना विकसित करना है।
प्रकृति केवल हमारे जीवन का आधार नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य विरासत है। वायु, जल, वन, मिट्टी, वन्यजीव और जैव विविधता—इन सभी का संरक्षण मानव जीवन और पृथ्वी के संतुलित भविष्य के लिए आवश्यक है।
हमारा विश्वास है कि प्रकृति की रक्षा केवल किसी एक संस्था या व्यक्ति का कार्य नहीं, बल्कि हर नागरिक का नैतिक दायित्व है। प्रकृति के प्रति हमारा व्यवहार ही आने वाले कल की दिशा तय करेगा।


प्रमुख उद्देश्य
04. पर्यावरणीय जागरूकता का विस्तार
पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक प्रदूषण एवं प्रकृति से जुड़ी चुनौतियों के प्रति नागरिकों, विद्यार्थियों और युवाओं में जागरूकता बढ़ाना।
05. जनभागीदारी एवं स्वयंसेवा
पर्यावरण संरक्षण को केवल अभियान नहीं, बल्कि जनआंदोलन बनाने के लिए नागरिकों, युवाओं, विद्यार्थियों एवं सामाजिक संस्थाओं की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करना।
06. बच्चों एवं युवाओं में प्रकृति संस्कार
नई पीढ़ी में प्रकृति के प्रति प्रेम, संवेदना, जिम्मेदारी और संरक्षण की आदत विकसित करना, ताकि पर्यावरण संरक्षण जीवन-मूल्य का हिस्सा बने।
07. हरित एवं सुरक्षित भविष्य का निर्माण
प्रकृति और मानव विकास के बीच संतुलन स्थापित करते हुए एक स्वच्छ, हरित, स्वस्थ और सुरक्षित भारत के निर्माण में योगदान देना।
प्रमुख उद्देश्य
01. प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण
वनों, वृक्षों, हरित क्षेत्रों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक एवं सहभागी बनाना।
02. प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
जल, भूमि, वायु एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण और जिम्मेदार उपयोग की संस्कृति को बढ़ावा देना।
03. जैव विविधता की रक्षा
पक्षियों, वन्यजीवों, पौधों तथा विभिन्न प्राकृतिक प्रजातियों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवासों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना।
हमारा संकल्प
प्रकृति रक्षक केवल पेड़ लगाने का अभियान नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने और उन्हें जीवन में उतारने का संकल्प है।
प्रकृति हमें जीवन देती है, इसलिए प्रकृति की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।
एक वृक्ष केवल हरियाली नहीं देता, एक बूंद केवल पानी नहीं है और एक स्वच्छ हवा केवल सुविधा नहीं—ये हमारे जीवन की अनमोल पूँजी हैं। आज प्रकृति के लिए उठाया गया हमारा प्रत्येक छोटा कदम, आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ी सुरक्षा बन सकता है।
प्रकृति रक्षक — प्रकृति के प्रति संवेदना, संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी और सुरक्षित भविष्य की ओर एक सामूहिक संकल्प।
Smt. Anjum Saxena
President of Naari Nav Nirman
Ms. Kusumlata Kashyup
Secretary of Naari Nav Nirman
Smt. Neha Bhardwaj
Joint Secretary of Naari Nav Nirman
Ms. Shivani Chaudhary
Social Media Coordinator of Naari Nav Nirman
