
सदाचार संहिता
आदर्श वाक्य — “सदाचार से चरित्र, चरित्र से समाज, समाज से राष्ट्र”
सदाचार संहिता भारत पुत्र फाउंडेशन की एक मूल्य-आधारित पहल है, जिसका उद्देश्य व्यक्ति के जीवन में सत्य, ईमानदारी, अनुशासन, मर्यादा, कर्तव्यबोध, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे सद्गुणों को मजबूत करना है।
हमारा विश्वास है कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति केवल उसकी भौतिक प्रगति में नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के चरित्र, आचरण और संस्कारों में निहित होती है। अच्छे विचार तभी सार्थक बनते हैं, जब वे अच्छे व्यवहार और जिम्मेदार कर्मों में दिखाई दें।
सदाचार संहिता का उद्देश्य नियमों का बोझ बढ़ाना नहीं, बल्कि जीवन में ऐसे मूल्यों को विकसित करना है जो व्यक्ति को स्वयं के प्रति ईमानदार, समाज के प्रति संवेदनशील और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार बनाएँ।



प्रमुख उद्देश्य
04. सम्मान एवं संवेदनशीलता की भावना
प्रत्येक व्यक्ति के सम्मान, गरिमा और अधिकारों का आदर करने तथा समाज में सहयोग, सहिष्णुता और संवेदनशील व्यवहार को बढ़ावा देना।
05. विचार और व्यवहार में सकारात्मकता
सकारात्मक सोच, संयमित भाषा, विनम्र व्यवहार और समाधानपरक दृष्टिकोण के माध्यम से स्वस्थ सामाजिक वातावरण का निर्माण करना।
06. सामाजिक एवं राष्ट्रीय उत्तरदायित्व
व्यक्ति को अपने परिवार, समाज, पर्यावरण और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने तथा जिम्मेदारीपूर्वक निभाने के लिए प्रेरित करना।
07. संस्कारित एवं जिम्मेदार समाज का निर्माण
सदाचार, संस्कार और नैतिक मूल्यों से प्रेरित ऐसे नागरिकों का निर्माण करना जो अपने आचरण से समाज में विश्वास, सम्मान और सकारात्मक परिवर्तन की नींव मजबूत करें।
प्रमुख उद्देश्य
01. सत्य एवं ईमानदारी को बढ़ावा देना
व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन में सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और ईमानदार व्यवहार को जीवन-मूल्य के रूप में स्थापित करना।
02. चरित्र एवं नैतिक मूल्यों का निर्माण
व्यक्तियों, विशेषकर बच्चों और युवाओं में नैतिकता, आत्मसंयम, मर्यादा, जिम्मेदारी और अच्छे आचरण की भावना विकसित करना।
03. अनुशासन एवं कर्तव्यबोध को मजबूत करना
समय, नियम, जिम्मेदारियों और सामाजिक मर्यादाओं के प्रति सम्मान विकसित करते हुए अनुशासित जीवनशैली को प्रोत्साहित करना।
हमारा संकल्प
सदाचार संहिता केवल नियमों की सूची नहीं, बल्कि बेहतर जीवन और बेहतर समाज के लिए मूल्यों को व्यवहार में उतारने का संकल्प है।
चरित्र वह संपत्ति है जिसे कोई छीन नहीं सकता
सदाचार वह प्रकाश है जो व्यक्ति से समाज तक मार्ग दिखाता है।”**
समाज को बदलने के लिए हमेशा बड़े कदमों की आवश्यकता नहीं होती। एक सच्चा शब्द, एक ईमानदार व्यवहार, एक जिम्मेदार निर्णय और एक सही आचरण भी परिवर्तन की शुरुआत बन सकता है।
पहले स्वयं में सदाचार, फिर परिवार में संस्कार
“सदाचार हमारा संस्कार, कर्तव्य हमारी पहचान और राष्ट्रहित हमारा संकल्प।”
Smt. Anjum Saxena
President of Naari Nav Nirman
Ms. Kusumlata Kashyup
Secretary of Naari Nav Nirman
Smt. Neha Bhardwaj
Joint Secretary of Naari Nav Nirman
Ms. Shivani Chaudhary
Social Media Coordinator of Naari Nav Nirman
